अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में प्रो. राजीव कृष्ण सक्सेना की रचनाएँ —

इक पल
विवशता

 

इक पल

इक पल है नैनों से नैनों के मिलने का
बाकी का समय सभी रूठने मनाने का

इक पल में झटके से हृदय टूक-टूक हुआ
बाकी का समय नीर नैन से बहाने का

इक पल की गरिमा ने बुध्द किया गौतम को
बाकी का समय तपी ज़िंदगी बिताने का

पासों से पस्त हुए इक पल में धर्मराज
बाकी का समय कुरुक्षेत्र को सजाने का

इक पल में सीता का हरण किया रावण ने
बाकी का समय राम कथा को सुनाने का

चमक गई दमक गई इक पल नभ पर तड़िता
बाकी का समय सभी गरज बरस जाने का

इक पल की महिमा है इक पल का जादू है
इक पल का निश्चय ही जीवन पर काबू है

इक पल जल कर करता जीवन पथ आलोकित
बाकी का समय लक्ष्य छोड़ भटक जाने का

9 जनवरी 2007

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter