अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में रानी थॉम्पसन की 
रचनाएँ-

नयी रचनाओं में-
जीवन भोर
प्रतीक्षा
बात
रात
साँझ

छंदमुक्त में-
तुम से प्रेरित

संकलन में
प्रेम गीत- जब भी
ज्योतिपर्व- जलते रहो तुम दीप मेरे

 

प्रतीक्षा

फिर एक बार
इन्तज़ार ख़त्म होने को है
तुम्हारी आहट मैं सुन रही हूँ।

मेरे सीने की धक-धक
और साँसों में
सुर भीग रहे हैं
तर हो रहीं हैं
मेरी आकांक्षाएँ
तुम्हारे आने की आहट से
सपने उड़ने लगे हैं-
सुनहरे पंख लगा कर
उमंग
अठखेलियाँ करती हुई
दौड़ रही है मेरे चारों ओर।

बस
अब इन्तज़ार ख़त्म होने को है।
तुम लौट आओ।
मेरे हर पल
तुम्हारी प्रतीक्षा में ही बीते हैं।
हर पल... आशा को संजोकर रखा है
वो जो कभी टूटती नहीं।
वो अब भी पास है मेरे।
तुम आओ तो सही
देख लेना फिर

१ मई २०२४

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter