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  तुम्हारा आना

तुम्हारा आना,
आकर पास बैठ जाना,
बस बैठ ही जाना
क्योंकि बात करने की
तुम्हें आदत नहीं।
पर मेरी बातों पर
तुम्हारा हँस देना,
दिन भर की थकावट देख,
मुस्कुरा देना
और आँखों से ही,
दर्द पर मरहम लगा देना।
तुम्हारी इन छोटी-छोटी
शांत हरकतों पर,
मुझे अक्सर प्यार आ जाता है।
मेरे गुस्से को भी,
तुम्हारा स्नेह मिल जाता है।
और हमेशा ही तुम्हारा मौन,
मुझसे जीत जाता है।

1 अगस्त 2006

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