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अनुभूति में यश छाबड़ा की रचनाएँ

कविताओं में-
आईना
कल्पना
गाँव का कुआँ
फव्वारे का संदेश
बचपन का साथी
बारिश थमने के बाद
वो पुराना घर
हे प्रभु

 

फव्वारे का संदेश

जब तुम मुझे निहार रहे होते हो
मैं भी तुम्हें देख रहा होता हूँ
मुझे निहारते वक्त़ तुम सोचते होगे कि
यह भी कितना मस्त रहता है
न कोई गम न कोई परेशानी
दोस्त! परेशानियाँ किसकी ज़िंदगी में नही हैं?
सुख दुख, धूप छाँव तो ज़िंदगी मे आते रहते हैं
ध्यान से देखोगे तो पाओगे
मेरी ज़िंदगी में भी उतार चढ़ाव आते हैं
पर मुझे निहारते वक़्त तुम्हारी
आँखों में जो चमक पैदा होती है
वो मुझे प्रेरित करती है
अपने उतार चढाव भूल दुसरों
के लिए मुस्कुराने के लिए
तुम भी दुसरों के चेहरे पर
मुस्कुराहट लाने की कोशिश करो
तुम्हारे चेहरे पे मुस्कुराहट
खुद चली आएगी।

24 मई 2007

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