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अनुभूति में विद्यासागर जोशी की रचनाएँ-

छंदमुक्त में-
अपना रंग अनूप
उसी के जन्म से

खींचचान
छाप का छाप से

जानना
दिखती है वही
नेता जनता और नेता
प्रश्नपत्र कठिन है

 

दिखती है वही

कहाँ तक सहूँ
और कहाँ तक कहूँ
पूरे ईमान से
जहाँ जहाँ देखता हूँ
कदम रखता हूँ
सामने दिखती है वही
हर बार हर जगह
कुछ अलग-अलग सी
पर होती है सचमुच
बहुत बड़ी बहुत सख्त
एक ही चट्टान
और अलग-अलग
टकराते हैं उससे लोग
अलग-अलग मरते हैं
अनजान।

२० जुलाई २००९

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