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छंदमुक्त में-
मजदूर की दीवाली
मां तू बहुत याद आती है
मूर्तिकार की दीवाली
मेरी कविता

 

मूर्तिकार की दीवाली

लक्ष्मी की यह मूर्ति
आज की रात
पवित्र स्थान पर रखी
सुन्दर वस्त्र सज्जित
नाना प्रकार के
भोग से घिरी है
और उसका सर्जक
गंदी पड़ी झोपड़ी में
अँधेरा दूर करने को
तेल खोजता है
क्योंकि आज दीवाली है
यदि आज
घर में अंधेरा रहा
तो लक्ष्मी
और अधिक
कुपित हो जाएगी।

१ अप्रैल २००५

 

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