अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में डॉ. शिवदेव मन्हास की
रचनाएँ -

तीन प्रेम कविताएँ-
चुप्पी में जादू
प्रेम केवल खामोशी
ये मेरी उँगलियाँ

 

चुप्पी में जादू

प्रेमी की चुप्पी और शांति में
कोई जादू होता है
उसको देखकर
उसके जैसा
हो जाने को जी करता है।
तभी तो लोग
एकांत की तलाश करते हैं
कुदरत की गोद में जाते हैं
और खामोशी को
अपनी आगोश में भरते हैं।
प्रकृति की चुप्पी
इस बात का प्रमाण है
कि वह भी
किसी के प्यार में
अपनी सुध-बुध भुला बैठी है।

1 फरवरी 2007

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter