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खेलत गावत फाग
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मन के पलाश
महक फूलों की
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वसंती हवा-फागुनी आँगन
घरौंदा
धूप के पाँव-अमलतासी धूप

नववर्ष अभिनंदन-नव स्वर देने को

 

पीपल अनमोल
 

१
तरु पावन
साँसों को धड़कन
पीपल देता
वनो के तीरों पर
हरियाली फैला के

२
अमृत देता
पीपल का सागर
साँसों की गागर
जब भरता
धरती महकती
कोयल चहकती

३

पीपल गात
नहीं पूछता कभी
जन की जात
प्राण वायु है देता
है अमूल्य सौगात

४
दिन ओ रात
पीपल की शाखाएँ
करतीं बात
नहीं पूछतीं कभी
जन की यह जात

२५ अगस्त २०१४

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