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नये हाइकु-
धूप पंखुरी


हाइकु में-
सर्द दिन

माहिया में-
धूप छाँह सा मन

छंदमुक्त में-
खेलत गावत फाग
गुलाबी अल्हड़ बचपन
मन के पलाश
महक फूलों की
माँ तुझे प्रणाम

क्षणिकाओं में-
आगाही
एक चट्टान

संकलन में-
वसंती हवा-फागुनी आँगन
घरौंदा
धूप के पाँव-अमलतासी धूप

नववर्ष अभिनंदन-नव स्वर देने को

 

 

धूप पंखुरी

१
चिरैया उड़ी
तेज आँधी से लड़ी
बिखरे पंख।
२
नींद नदी-सी
लहरों-सा सपना
बहता रहा।
३
दूर है नाव
लहराता-सा पाल
हवा उदास।
४
भीगे हैं तट
पदचाप बनाती
बिखरी रेत।
५
नदी-सा मन
बहता लहरों-सा
सागर हुआ।
६
डूबती साँझ
जीवन-सी उतरी
विदा के रंग
७
धूप-पंखुरी
खिली फागुन बन
बजे मृदंग

९ मार्च २०१५

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