अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में आर पी शुक्ल की रचनाएँ-

छंद मुक्त में-
किराये के कंधे
पाँव के निशाँ
प्रतीक्षा के तीन युग

अंजुमन में-
अपनी किस्मत
छोड़कर गाँव

हाइकु में-
दस हाइकु

 

अपनी किस्मत

अपनी किस्मत के सितारों की तरफ़ क्या देखें।
डूबते वक़्त किनारों की तरफ़ क्या देखें।।

डोली जानी थी कहीं, कहीं लेके गए।
ऐसे कमज़र्फ़ कहारों की तरफ़ क्या देखें।।

मेरे ही बाग़ की कलियों को जिसने रौंद दिया।
ऐसी मग़रूर बहारों की तरफ़ क्या देखें।

हँसते ख़्वाबों को मेरे जिसने आज तोड़ा है
ऐसे गुस्ताख़ सितारों की तरफ़ क्या देखें।

जिसकी माटी से मेरे खूँ की महक आती हो,
ऐसे पौधों की कतारों की तरफ़ क्या देखें।

९ नवंबर २००९

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter