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कौन जाने
बीसवीं सदी
सन्नाटा

 

सन्नाटा

सन्नाटा शब्दमय हुआ
प्रेम भाव का उदय हुआ
फैल रही थी घर-घर
अंधकार की चादर
रोशनी उगी सहसा
बोलता हुआ
सन्नाटा शब्दमय हुआ
स्नेह भाव का उदय हुआ
झील-नदी-तालों ने
अनगढ़े सवालों ने
प्रकृति से कहा ले लो
शरद अनछुआ
सन्नाटा शब्दमय हुआ
गिरा-अर्थ का विलय हुआ
रेशम के फूल खिले
इति-अथ के कूल मिले
धूप जले पाँवों का
बोला बिछुआ
सन्नाटा शब्दमय हुआ
आज ईश भी सदय हुआ

9 जनवरी 2007

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