अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में निवेदिता जोशी की रचनाएँ-

कविताओं में-
आगत अनागत
डूबता सूरज
नंगे पाँव
मंज़िल की तलाश


संकलन में-
गाँव में अलाव - अपना गाँव

` नंगे पाँव

दर्द भरे रेगिस्तान में
नंगे पाँव के निशान दिखायी दिये
तो लगा कि जीवन यहीं है, यहीं कहीं है।
सहसा जब उन निशानों पर अपने पाँव पड़े
तो पता चला कि वह मेरे ही पाँव के ठहराव थे
ज़िन्दगी इसी मरुभूमि से तो पहले भी गुज़री थी
तो क्या यह ठहराव था या फिर मेरा जीवन
उन्हीं वीथियों में अभी भी भटक रहा है
जहाँ रेगिस्तान में सिर्फ़ तपते हुए नंगे
पाँव के निशान हैं।

 

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter