अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में एन के सोनी की रचनाएँ—

कविताओं में-
थोड़ा-सा दर्द
शब्दों का ताना-बाना
साधारण संसार

अंजुमन में-
फटी कमीज़
धूप का टुकड़ा

  फटी कमीज़

फटे-हाल देखा जब उसको, मन मेरा गया पसीज।
भरी भीड़ से मोहलत माँगे, उसकी फटी कमीज़।

बाज़ारों में नये-नये परिधान बिका करते हैं।
उसके पास थे थोड़े पैसे ले ली फटी कमीज़।

तन ढकना ही वस्त्रों का बस कर्म हुआ करता है।
सुन्दरता से कर्म निभाती उसकी फटी कमीज़।

सुबह-सवेरे इसे पहनकर रोज़ कमाने जाता।
दाल-रोटी का साधन बन गई उसकी फटी कमीज़।

सर्दी हो, गर्मी हो, चाहे हो मौसम बारिश का।
उसके तन की रक्षा करती उसकी फटी कमीज़।

धीमे-धीमे धोना इसको और न फट जाये।
प्राणों से भी प्रिय लगती है उसको फटी कमीज़।

नंगे बदन काम पर जाता, लोग भीख देते हैं।
स्वाभिमान की रक्षा करती, उसकी फटी कमीज़।

उसकी फटी कमीज आपकी, मेरी भी हो सकती है।
खुदा ना करे पड़े पहनना हमको फटी कमीज़।

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter