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अनुभूति में कुमार मुकुल की रचनाएँ-

कविताओं में-
चाँदनी का टीला
दफ़्तर में लड़की
प्यार- दो कविताएँ

बेदिनी में चाँद
हथियार

  दफ़्तर में लड़की

अपने मित्र को खोजती
आई एक लड़की
लगा सामान्य नाक-नक्शा है
फिर सुन्दर लगी वह
और मुसकराई
तो फूट पड़ी पाँत दाँतों की
जैसे फूटी हो हँसी
मैंने समेटी हँसी
और आ बैठा कमरे में चुपचाप।

४ अगस्त २००८

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