अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में अमिताभ सक्सेना की रचनाएँ—

छंदमुक्त में—
उम्मीदवार
मुजरिम

   

 

मुजरिम

जज ने वकील से पूछा
इस आदमी ने कौनसा
खतरनाक जुर्म किया है,
जो पुलिस ने इसे
मुजरिम करार दिया है।
वकील ने खुलासा किया,
"जी, इसने कुछ नहीं किया
यह तो बेक़सूर है
पर खूनी को
कत्ल करते हुए
इसने देखा जरूर है।
गवाह बनाकर इसे
जेल में रखा गया है
हवालात की हवा खाते
इसे हफ्ता हो गया है।"
झल्ला कर जज बोला
तो खूनी कहां पर है?
वकील ने बताया –
मी लार्ड
वह तो पिछले एक हफ्ते से
जमानत पर है।

९ सितंबर २००४

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter