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आपसे क्या मिली नजर
जिंदगानी पराई हुई
बात चलती रही
शब, शम्मा, परवाना

अंजुमन में-
अपना वह गाँव
आजमाइश ज़िंदगी से
कोई सोए कोई जागे
घुट घुटकर
जाम खाली

 

जिंदगानी पराई हुई

जिन्दगानी पराई हुई।
दर्द से आशनाई हुई।

ख्वाब आते बिखरते रहे,
रात भर रोशनाई हुई।

है मिला ये सिला-ए-वफा,
साथ बस बेवफाई हुई।

प्यार में ठोकरें यू मिलीं,
उम्र भर जगहँसाई हुई।

कर न पाई दुआ भी असर,
थी दवा आजमाई हुई।

बाँस की पालकी चढ़ 'विमल`,
चार काँधे विदाई हुई।

२५ अक्तूबर २०१०

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