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अनुभूति में हसन सिवानी  की रचनाएँ-

आजकल
इन दिनों
मैं तुझे चाहूँगा
यादों का साया
शम्मे वफ़ा जलाएगा
 

 

यादों का साया

यादों का जब साया होगा।
दिल का आलम कैसा होगा।

सहरा में चलता वो मुसाफ़िर,
पानी को भी तरसा होगा।

नक्शे-कदम पे उनके चलकर,
कोई मुसाफ़िर भटका होगा।

शोख फ़िज़ा में मस्त पवन थी,
कोई न कोई भटका होगा।

ज़ख़्म जो दिल का हरा हुआ है,
क्या जाने कब अच्छा होगा।

मेरी बरबादी से उसने,
कुछ न कुछ तो सोचा होगा।

आओ ख़रीदें इश्को वफ़ा को,
महंगा मगर ये सौदा होगा।

छोड़ दिया जो साथ 'हसन' ने,
उसका भी दिल टूटा होगा।

२ फरवरी २००९

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