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पत्र व्यवहार का पता

अभिव्यक्ति  ४. ८. २००८

अंजुमन । उपहार । कवि । काव्य चर्चा । काव्य संगम । किशोर कोना । गौरव ग्राम । गौरवग्रंथ । दोहे । रचनाएँ भेजें
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हँसी आ रही है

हँसी आ रही है सवेरे से मुझको
कि क्या घेरते हो अंधेरे में मुझको!

बँधा है हर एक नूर मुट्ठी में मेरी
बचा कर अंधेरे के घेरे से मुझको!

करें आप अपने निबटने की चिंता
निबटना न होगा निबेरे से मुझको!

अगर आदमी से मोहब्बत न होती
तो कुछ फ़र्क पड़ता न टेरे से मुझको!

मगर आदमी से मोहब्बत है दिल से
तो क्यों फ़र्क पड़ता न टेरे से मुझको!

शिकायत नहीं क्यों कि मतलब नहीं है
न ख़ालिक न मालिक न चेरे से मुझको!

हँसी आ रही है सवेरे से मुझको
कि क्या घेरते हो अंधेरे में मुझको!

--भवानी प्रसाद मिश्र

इस सप्ताह

 पुनर्पाठ में-
भवानी प्रसाद मिश्र

अंजुमन में-
अंबर बहराइची

छंदमुक्त में-
कुमार मुकुल

नई हवा में-
विकास चंचल

हाइकु में-
विकास परिहार

पिछले सप्ताह
२८ जुलाई २००८ के अंक में

नए संकलन में वर्षा से भीगी २१ कविताओं का बिलकुल नया संग्रह-
सावन के सुहाने मौसम में

पुराने संकलन में- वर्षा की बौछारों से भीगी १२० रचनाओं के सचित्र संकलन वर्षा मंगल के अंतर्गत

 अन्य पुराने अंक

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प्रकाशन : प्रवीण सक्सेना -|- परियोजना निदेशन : अश्विन गांधी
संपादन¸ कलाशिल्प एवं परिवर्धन : पूर्णिमा वर्मन
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