अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

        सर्दी फिर आई

 

बीत गईं बरसात अब लो धरती मुस्काई
लेकर सुखमय धूप गुनगुनी
सर्दी फिर आई

सिमट चले यौवन व्यतीत कर
सर सरिता सारे
पुलक भरे वादी की युति में
कुसुम रंग न्यारे

रात सितारों भरा थाल ले
फिरती इतराई

सरपट लगे भागने दिन तो
रजनी इठलाये
सूरज अलसाया तो चंदा
छेड़े मुस्काए

ओस गिरे यों साँझ पसीजे
रात थरथराई

चूल्हे पे मक्के की रोटी
सरसों वाला साग
गुड़ की भेली मक्खन ताजा
खट्टी सौंधी छाछ

पेट भरे पर मन न माने
ऐसी रुत आई

- अमित खरे
१ दिसंबर २०२०

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter