अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

   

       ज्योतिमय दीपावली


रौशनी की हर तरफ़ बरसात है
ज्योतिमय दीपावली की रात है

हर तरफ़ लोगों में
इक उल्लास है सब मस्त हैं
हम सभी इस पर्व में
इस दृश्य के अभ्यस्त हैं
रात्रि है, यद्यपि दिवस भी मात है
ज्योतिमय दीपावली की रात है

थी विगत वर्षों में भी
दीपावली की यह बहार
किन्तु अब वातावरण में
है अनोखा ही निखार
ये प्रगति - पथ की हमें सौगात है
ज्योतिमय दीपावली की रात है

हम प्रगति के मार्ग पर
निशि - दिन रहेंगे अग्रसर
प्यार से सँग - सँग चलेंगे
देश के सब हमसफ़र
शत्रु - हृदयों पर यही आघात है
"शून्य" यह दीपावली की रात है

भूपेन्द्र सिंह "शून्य"

१ नवंबर २०२३
   

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है