अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

   

          त्यौहार के हैं दिन


आ गए तीज के
त्यौहार के हैं दिन

चुनाव में हैं, उछल रहे नारों से
बाज आए फूल भी, अब खारों से
एक है तारीख तो
पगार के हैं दिन

घर में प्रकाश, दिया तले अंधेरा
खंडहर में है, अमावस का डेरा
चार लोग मिलेंगे
दरबार के हैं दिन

लड़ियाँ हैं, बम हैं, अनार हैं चलते
उत्कोच में ज्यों, उपहार हैं चलते
प्यार का मौसम है
दीदार के हैं दिन

अविनाश ब्यौहार

१ नवंबर २०२३
   

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है