अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

       

         फुलझड़ियों का उत्सव


आओ फुलझडियो का
उत्सव मनाएँ

बिहंस रही रोशनी धरा और अंबर में
फुलझडियो सी जिंदगी है जीवन के दर्पण में
पुलकित मन झूम झूम गाएँ गीत सृजन के
आओ हम आलोकित
हर मन कर जाएँ

आओ फुलझडियों का उत्सव मनाएँ
दीपों की माला में बाँध लिया मन को
किरण किरण रोशनी की सिहराती तन को
आओ सखी नभ से
आलोक माँग लाएँ


चहुँ दिशि बिखराती रुप की छटाएँ
जगमग कर तिमिर को प्रकाश भर जाएँ
जीवन का हर पल प्रदीपित हो जाए
दूर हों निराशा की
उमड़ती घटाएँ

- पद्मा मिश्रा
१ अक्टूबर २०२२

       

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है