अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

     

         कंदील की तरह

१
सहारा

जीवन की आधी रात का फ़ेरा
घुप्प अंधेरा
मित्र एक तुम्हारा-
हो मुश्किल में बहुतेरा
कंदील की तरह बनो सहारा
जब तक हो नया सवेरा

२
नेकी

सारे घर में अगर
रौनक नहीं ला सकते
द्वार पर
एक कंदील तो जला सकते हैं
रोशनी के लिये

३
स्मृति

फिर है दीवाली
लग गई बिजली की झालर
दीपकों की कतार
पर नहीं लगा इस साल
कंदील
शायद जो लगाता था
अब नहीं है उस घर में

४
विरह

आँखों में
न कजरा, न आँसू, न नींद
न दिल में करार
कंदील में रात भर
दिया टिमटमाता रहा
द्वार पर

- आनंद खरे

१ नवंबर २०२१

     

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter