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         लाडली कंदील

कितनी रंगों में ये सज कर लाड़ली कंदील
कर रही है लक्ष्मी की बंदगी कंदील

हर तरफ फैला रही है रोशनी कंदील
खुशनुमा करती है सबकी जिन्दगी कंदील

रात हो बेशक भयानक फिर भी ये बे ख़ौफ़
झोपड़ी में महल में शब भर जली कंदील

अपने बच्चों की खुशी के वास्ते ही तो
टाँग दी है हमने अपने घर बड़ी कंदील

ग़मज़दा लोगों को आखिर दे गई संदेश
किस तरह जलते हुये भी खुश रही कंदील

रात मावस की थी काली घुप अँधेरा था
और उनके सामने तन कर खड़ी कंदील

हर किसी के मन को कितनी भा रही है ये
लाल पीली बैंगनी नीली हरी कंदील

- राम अवध विश्वकर्मा
१ नवंबर २०२१

     

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