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           अपना ध्यान रखना

 
कीर्ति की अनगढ़ कहानी गढ़ रही है ठंड
अपना ध्यान रखना

विश्व भर यह घूमती है मान है,
एक ऋतुचर्या शिविर है शान है
रात-दिन अनचढ़ पहाड़ी चढ़ रही है ठंड
अपना ध्यान रखना

यहाँ जीने और मरने की प्रथा है
'पुन: लेना जन्म' वैसे भी कथा है
साल भर अनपढ़ पहाड़ा पढ़ रही है ठंड
अपना ध्यान रखना

कहे जाने योग्य कुछ हो तो सही है
'ह्वांगहो' है यह सदा उलटी बही है
शह मिली है, राजपथ तक बढ़ रही है ठंड
अपना ध्यान रखना

- शिवानन्द सिंह 'सहयोगी'
दिसंबर २०२४

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