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            सूर्य करे आराम

 
मौसम सर्दी का हुआ, सूर्य करे आराम
धुंध रजाई ओढ़ के, खुद करता विश्राम

लुका छिपी के खेल में, करे शरारत खास
धूप डोर से खींचती, सबको अपने पास

गजक रेवड़ी से सजे, आस पास बाजार
मूँगफली की महक भी, करती है लाचार

गर्म चाय की महक से, उत्साहित हैं लोग
तन मन को आनंद दे, कुल्हड़ कर संयोग

श्वेतांबर धरती बने, बर्फ दुशाला ओढ़
तापस जैसे वृक्ष भी, खड़े लगें बेजोड़

छत मुंडेर या वृक्ष पर, आकर प्यारी धूप
मन ललचाता देख के, करतब करती खूब

लिपटें कपड़ों में सभी, रेशम कीट समान
कितनी परतें हो भले, शीतल ऋतु की शान

बच्चों को खुशियाँ मिलें, हिम मानव निर्माण
उछलें कूदें बर्फ में, किलकारियाँ प्रमाण

- ज्योतिर्मयी पंत
दिसंबर २०२४

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