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            प्रदूषण का कोट

 
सर्दी आई पहन कर, प्रदूषण का कोट
घर में सब दुबके रहे, दरवाज़ों की ओट

धीरे-धीरे बढ़ रही, है सर्दी की चाल
अम्मा ने पकड़ा दिये, स्वेटर शाल निकाल

धूप खड़ी दीवार पर, कहती आ जा बैठ
बाट जोहती आएगी, कब खिड़की से पैठ

सुबह शाम सर्दी लगे, सूरज को हर रोज़
सुबह देर से जागता, छिपे जल्द हर रोज़

सडकों पर सर्दी कड़क, कैसे काटें रात
आँच सहारे बच रहा, सिमटा ठिठुरा गात

- अलकेश त्यागी
दिसंबर २०२४

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