चौदह वर्षों बाद

 
  चौदह वर्षों बाद मिली है खुशियों की जागीर
अवधपुरी में आज पधारे हैं
रघुकुल के वीर

आगे हैं हनुमंत गुसाईं, पीछे दोनों भाई
राम-लखन के मध्य आ रहीं सकल विश्व की माई
देव-लोक के देव चकित हैं देख देव-प्रभुताई
मानो सूर्य चंद्र उतरे हैं
फिर सरयू के तीर

कोई मंगल गीत सुनाता, कोई चित्र उकेरे
कोई दीप जलाकर लेता है खुशियों के फेरे
सूरज की तैनाती रहती प्रतिदिन साँझ-सवेरे
धीर पुरुष के दर्शन-हित सब
होते आज अधीर

धार कपूर अगरबत्ती से नजर उतारें मैया
बहुत दिनों के बाद बजी है अँगने आज बधैया
बहुत दिनों के बाद सुरक्षित घर लौटी गौरैया
माँ कैकेयी पका रही हैं
मीठी-मीठी खीर

- सत्यशील राम त्रिपाठी
१ अप्रैल २०२४

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