राम अयोध्या लौटे

 
  प्रमुदित राम अयोध्या लौटे
शुभ दिन है
इस साल का

कनक भवन से दिखतीं पावन
लहरें सरयू माता की
सूर्य रश्मियाँ स्वागत में हैं
जग के भाग्य विधाता की
यह वनवस नहीं चौदह का
रहा हजारों
साल का

अवधपुरी की गलियाँ गूँजें
फिर शुभ मंगल गानों से
पुनः प्रतिष्ठित हुआ सनातन
अनगिन तप बलिदानों से
भव्य दिव्य मंदिर स्वागत में
युग बीता
तिरपाल का

यज्ञ हवन वैदिक मंत्रों से
विश्वसांति, शुभ मंगल हो
जहाँ शुष्क हो धरा प्रेम की
वहाँ भक्ति का बादल हो
खुशबू रंग नयी आभा ले
खिले कमल
हर ताल का

- जयकृष्ण राय तुषार
१ अप्रैल २०२४

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