हे राम तुम्हारी राहों में

 
  हे राम तुम्हारी राहों में मैं
पलक बिछायें बैठी थी
काँटा न चुभे तेरे पाँवों में
मै फूल बिछाये बैठी थी

तुम मेरे राम मै अहिल्या तुम्हारी प्रभू
हे राम तुम्हारे चरणों की
मैं आस लगाए बैठी थी

तुम मेरे राम मै शबरी तुम्हारी प्रभु
बरसो से दोने में मैं झूठे
बेर छुपाए बैठी थी

वही पीत पीताम्बर और वही तिलक प्रभु
हे राम मै तेरे दरसन को
बिन पलक झपाए बैठी थी

पूर्ण हुआ वन-जीवन अवध निहाल प्रभु
कबसे मैं हाथों में फूलों का
थाल सजाए बैठी थी

- अपर्णा गुप्ता
१ अप्रैल २०२४

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