पावन कृपानिधान

 
  प्राण-प्राण में बस रहे पावन कृपा-निधान
'प्राण-प्रतिष्ठा' के लिए, प्रकटे फिर भगवान

तीर्थ अयोध्या शीर्ष है, शीर्षक 'जय श्री राम'
पावन करने धाम को, आये सीता - राम

अपनी संस्कृति-साधना, और सिद्धि का योग
राम अयोध्या धाम का, अद्भुत है संयोग

देश हमारा श्रेष्ठतम, वैश्विक सत्ता राम
जन-जन के उर में बसे, सहज-सरल अभिराम

सत्य-धर्म-आनन्द के, सुन्दर रूपाकार
भक्त जनों के प्रेम के, राम एक आधार

पावन दर्शन सुलभ हैं, पावन प्रभु का नाम
रोम-रोम में बस रहे राम लला अभिराम

जन-जन के मन से हुए, निर्गत सब सन्ताप
सर्व लोक में व्याप्त है, प्रभु का तेज प्रताप

भारत माँ हर्षित हुई, हर्षित सकल समाज
रामराज्य सार्थक हुआ, हर्षित जन-जन आज

सदियों की आराधना, सफल हुई साकार
शक्ति रूप श्री राम की, होगी जय-जयकार

- मिथिलेश दीक्षित
१ अप्रैल २०२४

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