राम का अवतार

 
  प्रवृत्तियाँ
आजकल कुछ संक्रमित हैं
मानवीयता की है
आवश्‍यकता आज

कहते हैं नेक साथ हो
यदि नाव में
तूफान में फँसे हुए
लगे हैं पार
रावणों के बीच में
विभीषण हो बस
भले ही राक्षसी हलचल
बढ़ें हजार

ज्यादतियाँ
आजकल कुछ संक्रमित हैं
सहिष्णुता की है
आवश्‍यकता आज

राम का अवतार रहा
दृष्टांत एक
आसुरी प्रवृत्तियों के
उपरांत नेक
संस्कारों के अधीन
जीवन बढ़ा फि‍र
राष्ट्रहित चिंतन का था
सिद्धांत एक

परिस्थितियाँ
आजकल कुछ संक्रमित हैं
मर्यादा की है
आवश्‍यकता आज.

विश्व में है फैल रहा
संक्रमण नित
हों आँकड़े इतिहास में
अब सम्मिलित
क्‍या हवा बदलाव अब
लाएगी नया
क्‍या चमत्‍कार के हैं
आसार किंचित्

हस्तियाँ भी
आजकल कुछ संक्रमित हैं
राष्ट्रीयता की है
आवश्‍यकता आज.

- गोपालकृष्ण भट्ट आकुल
१ अप्रैल २०२०

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter