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होली आ गई

 

  अंगड़ाई ले रही है प्रकृति नटी की देह
होली आ गई!
बौराई हवा दे गई सन्देश,
होली आ गई!

जल उठे जंगल में पलाश
जागी है मन में नई आस,
मुस्कराए अमलतास।
होली आ गई!

जल गया जो था अशुभ
असुन्दर, अतीत।
मन में रच गई नई प्रीत
होली आ गई!

रंगों की भरकर पिचकारी
साजन ने मुझपर मारी
बोले, तू क्यों खड़ी मुँह फेर?
होली आ गई!

- इला प्रसाद

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