अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

फागुन के ये रंग

 

  फागुन के रंग
नवयौवन उमंग
अंग-अंग नितनव तरंग
सजनी साजन के है संग
फागुन के हैं रंग

ढोलक की धम धम धमाक धमधम
दिल की धक धक धक से मिला हुआ सम
आज़ाद उड़े रे मन पतंग
आज़ाद उठे पग
बिन घूँघर छम-छम
राधा कृष्ण का आलौकिक नर्तन
धरती व्योम का आज है संगम

कल का कोई अस्तित्व नहीं है
कल और कल बेताल असंगत
केवल ये ही पल है सक्षम
बस ये ही इक पल है
नवयौवन उमंग संग
फागुन के रंग संग

फागुन के हैं रंग।

-प्रेम माथुर

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter