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         खुली पाठशाला फूलों की

 

खुली पाठशाला फूलों की
पुस्तक-कॉपी लिए हाथ में
फूल धूप की बस में आए

कुर्ते में जँचते गुलाब तो
टाई लटकाए पलाश हैं,
चंपा चुस्त पज़ामें में है
हैट लगाए अमलताश है

सूरजमुखी मुखर है ज़्यादा
किंतु मोंगरा अभी मौन है,
चपल चमेली है स्लेक्स में
पहचानों तो कौन-कौन है

गेंदा नज़र नहीं आता है
जुही कहीं छिपाकर बैठी है,
जाने किसने छेड़ दिया है
ग़ुलमोहर ऐंठी-ऐंठी है

सबके अपने अलग रंग हैं
सब हैं अपनी गंध लुटाए,
फूल धूप की बस में आए
मुस्कानों के बैग सजाए

- तारादत्त निर्विरोध
१ सितंबर २०२४

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