अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

         शिक्षा, ग्रहण करेंगे

 

आओ शिक्षा, ग्रहण करेंगे बिल्डिंग भले नहीं
खुली हवा में बैठें, ए. सी. -
ना हो खले नही

पाठ सरल, शांति से सीखो सरल रहो, ना एठो
भटके मन ना इधर, ध्यान दो आसन पर आ बैठो
जूते दूर रखें, चप्पल के
दर्शन चले नहीं

नारी शिक्षा, से समाज में, चमत्कार ही होगा
ज्ञान, लिये दीपक हाथों में, तजो तमस का चोगा
पढना लिखना बड़ा जरूरी
अनपढ चले नही

शोषण हो समाज में जब-जब, अवश्य मुखड़ा खोलो
घर में अत्याचार सहो ना, मुखरित हो कर बोलो
हक माँगो बस, अब कुटुम्ब की
बहुएँ जलें नहीं

मैत्रेयी गार्गी का भारत खोज रहा नूतन राहें
विदुषियां विद्वान सभा में, वैचारिक-विनिमय चाहें
अंधकार हो दूर, ज्ञान का-
सूरज ढले नही

- हरिहर झा
१ सितंबर २०२४

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter