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नव वर्ष अभिनंदन

क्या उपहार दूँ

         

सपनीली कुछ ख़्वाहिश दूँ
या ख़्वाबों की जुंबिश दूँ
नए साल की सौग़ात नई
खुशियों की बौछार दूँ
बोलो क्या उपहार दूँ
उगते सूरज की किरनें
खुशबू महके फूलों की
शोहरत उस चाँद की
मस्ती सावन के झूलों की
जागे हुए अरमानों की
ऐसी ही रंगी बयार दूँ
बोलो क्या उपहार दूँ
क़समें नई वादे नए
मंज़िलें नई नए रास्ते
बुलंदियाँ हैं कर रहीं
इंतज़ार तेरे वास्ते

अपनी महकी खुशियाँ भी
तुझ पर ही मैं वार दूँ
बोलो क्या उपहार दूँ
जीवन के अनमोल लम्हे
सपनों की कुछ आहटें
हर कदम पर तेरे
खिलती रहे मुसकुराहटें
महका-सा कुछ चहका-सा
सजीला एक संसार दूँ
बोलो क्या उपहार दूँ
आज की कुछ यादें दूँ
कल के लिए वादे दूँ
सौग़ात में तुझको अटूट
अमिट दोस्ती का करार दूँ
ऐसा एक उपहार दूँ
ऐसा एक उपहार दूँ

'मुंतज़िर' पुनीत विजय

  

जश्न नववर्ष

भारत को जन्नत बनाएँगे
जश्न नववर्ष का मनाएँगे

ढ़ल गया दिन ढ़ूँढ़ता था
सपनों में खोया रहता था
ना आए पिछे साया भी
पदचिन्ह अपने मिटाता था

डर को अब भगाएँगे
जश्न नववर्ष का मनाएँगे

संबोधन पुराना घेरता मन को
ज्यों प्रवासी लौट आया घर को
रहा गया कृषक बीज बोए बिन
तकता रहा त्यों मैं बदली को

खुशी के जाम छलकाएँगे
जश्न नववर्ष का मनाएँगे

कुछ फैसले सुनाकर जो
विश्वास जगाया जनता में
नहीं बच पाए मंत्री-संत्री
धकेला पिछें सलाखों के

बस यूँही न्याय चाहेंगे
जश्न नववर्ष का मनाएँगे
 

क्या औकात है किसकी अब
हुआ जरूरी तो बतलाएँगे
मिलजुल कर रहेंगे हम
भारत को जन्नत बनाएँगे

जश्न नववर्ष का मनाएँगे
जश्न नववर्ष का मनाएँगे

- गिरिराज जोशी "कविराज"
 

 

 

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