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नवल वर्ष
 
 
नव विचार
नव चिन्तन लाया
नवल वर्ष !

नवल भोर
अपने सँग लायी
नवल रीति
प्रबल प्रेम
पाकर पनपी है
परम प्रीति

नव विहान
छँट गयी तमिस्रा
नवल दर्श!

सहज ध्यान
आलोकित अन्तस
सजग दृष्टि
सतत ज्ञान
आलोड़ित मानस
सुघड़ सृष्टि

नव वितान,
धरती पर छाया
नवल हर्ष!

- राजेन्द्र वर्मा 
१ जनवरी २०१८

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