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सुषमा दुबे की मुकरियाँ

 


शूर वीर वो है कहलाता
विश्व उसकी बात मानता
ऊंचा है उसका स्थान
क्या सखि साजन ?
ना हिंदुस्तान!


विश्व गुरु है उसका नाम
शांति फैलाना उसका काम
देता है वो सबको राहत
क्या सखि साजन?
ना री भारत!


बिना बात के शोर मचाता
धीरे से घर में आ जाता
याद दिला दी मेरी नानी
क्या सखि साजन
ना सखी.... पानी

उसके नाम से सब घबराए
जिस घर जाए उसे रुलाए
उसके नाम से आए रोना
क्या सखि साजन?
नहीं कोरोना

बेमौसम आकर डरपाए
आकर रोज मुझे भरमाए
दिन देखे ना देखे रात
क्या सखि साजन
ना ....बरसात

- सुषमा दुबे
१ अगस्त २०२६

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