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सुरेन्द्र कुमार शर्मा की मुकरियाँ

 

१. (मोबाइल)
दिन भर मुझसे बातें करता,
दूर देश की खबरें धरता।
हाथों में हर पल रहता है—
अरी सखि, साजन नहीं, सखि मोबाइल

२. (पुस्तक)
चुप रहकर भी ज्ञान सुनाए
जीवन का हर मार्ग बताए
खोलो तो संसार दिखाए—
अरी सखि, साजन नहीं, सखि पुस्तक

३. (चाँद)
रात-रात भर मिलने आता,
शीतल किरणों से मुस्काता।
भोर हुई तो छिप-सा जाता—
अरी सखि, साजन नहीं, सखि चाँद

४. (कलम)
साथ सदा यह मेरे रहती,
मन की सारी बातें कहती।
भाग्य बदलने की शक्ति रखती—
अरी सखि, साजन नहीं, सखि कलम

५. (दर्पण)
सामने आते ही मुस्काए
मेरा रूप मुझे दिखलाए
कुछ भी मुझसे कभी न छिपाए—
अरी सखि, साजन नहीं, सखि दर्पण

६. (दीपक)
अँधियारे से युद्ध मचाए
जलकर सबको राह दिखाए
तेल मिले तो हँसता जाए—
अरी सखि, साजन नहीं, सखि दीपक

७. (बादल)
काले-काले रूप बनाता
गर्जन करके मन भरमाता
बरसे तो जीवन महकाता—
अरी सखि, साजन नहीं,सखि बादल

८. (घड़ी)
हर पल मेरे संग ही रहती
बिन बोले सब बातें कहती
क्षण-क्षण का हिसाब यह रखती—
अरी सखि, साजन नहीं, सखि घड़ी

९. (नदी)
कल-कल करती गीत सुनाती,
पर्वत से मैदान में आती।
सबकी प्यास सदा बुझाती—
अरी सखि, साजन नहीं, सखि नदी

१०. (वृक्ष)
धूप स्वयं सिर पर सह लेता
सबको शीतल छाया देता
फल-फूलों से घर भर देता—
अरी, साजन नहीं, सखि वृक्ष

- सुरेन्द्र कुमार शर्मा
१ अगस्त २०२६

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