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पवन सिंह बैश की मुकरियाँ

 


गुनगुन गीत कान में गाये
सोते से वह मुझे जगाये
धुन में पढ़े प्रेम के अक्षर
क्या सखि साजन? ना सखि मच्छर


उसके बिना नहीं जिंदगानी
ना तेरी ना मेरी कहानी
दुनिया भी उस बिन वीरानी
क्या सखि साजन? ना सखि पानी


हर पल लगे मुझे वो अपना
भांति भांति की करूं कल्पना
रोज देखते मेरे नयना
क्या सखि साजन?
ना सखि सपना


जैसे ही वो घर में आए
उसे देख मन खुश हो जाए
रातें मेरी उजली-उजली
ऐ सखि साजन? ना सखि बिजली


जब भी वो मुझको मिल जाए
उसे देख मन खुश हो जाए
चेहरे पर होती स्माईल
ऐ सखि साजन? नहिं मोबाइल


उससे मेरा गहरा नाता
वो आता मन खुश हो जाता
उसके बिना रहूँ मैं दुखिया
ऐ सखि साजन? ना सखि रुपिया


मुझको मन की बात बताता
वो आता मन खुश हो जाता
हर पल करती उसका वेट
ऐ सखि साजन? नहिं री नेट!

- पवन सिंह बैश
१ अगस्त २०२६

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