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महेन्द्र तिवारी की मुकरियाँ

 

१. बादल
घिर-घिर कर वह नभ पर छाए
मधुर-मधुर वह शोर मचाए
देख उसे मेरा मन पागल
क्यों सखि साजन? ना सखि, बादल

२. मेह
अंग-प्रत्यंग वह मेरे छूता
प्यार जता कर मन को लूटा
तन-मन में भर देता नेह
क्यों सखि साजन? ना सखि, मेह

३. बिजुरी (बिजली)
रात अँधेरी मुझे डराए
रह-रह कर वह चमक दिखाए
थर-थर काँपूँ, साँस अधूरी
क्यों सखि साजन? ना सखि, बिजुरी

४. छाता
घर से जब भी बाहर आऊँ
अपने सिर पर उसे बिठाऊँ
हर पल मेरा साथ निभाता
क्यों सखि साजन? ना सखि, छाता

५. मेंढक
जल भरि ताल किनारे आए
टर्र-टर्र कर वह शोर मचाए
देख मुझे वह जाता ठिठक
क्यों सखि साजन? ना सखि, मेंढक

६. कीचड़
रस्ता रोके, चाल बिगाड़े
पकड़ पाँव, वह छींटे मारे
चलने में कर देता लंगड़
क्यों सखि साजन? ना सखि, कीचड़

७. इंद्रधनुष
सात रंग के कपड़े पहने
नभ पर जड़े रूप के गहने
उसको देख सभी होते खुश
क्यों साजन? ना सखि इंद्रधनुष

८. मोर
काले बादल देख लुभावे
छम-छम करके नाच दिखावे
चितवन खींचे अपनी ओर
क्यों सखि साजन? ना सखि, मोर

-महेन्द्र तिवारी
१ अगस्त २०२६

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