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आकुल की मुकरियाँ

 

१
जब तब आ घनश्याम लुभाए
निर्मोही को तरस न आए
मन चाहे जब आता पागल
क्या सखि साजन? ना सखि 'बादल'
२
बातें करते मन ना भरता
जहाँ जहाँ मैं जाऊँ चलता
हैं उसकी एक अलग स्टाइल
क्या सखि साजन? ना 'मोबाइल'
३
क्‍यों उसके बिन रह ना पाऊॅ
वो ना सँग हो दर्द बढाऊँ
वो हो तो रहती है स्‍माइल
क्या सखि साजन? ना 'मोबाइल
४.
शेखी वह ना कभी बघारे
चुटकी में करता हल सारे
उसके आगे मैं हूँ जाहिल
क्या सखि साजन? ना 'मोबाइल'

- आकुल
१ अगस्त २०२६

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