अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

मेरा भारत 
 विश्वजाल पर देश-भक्ति की कविताओं का संकलन 

 

शुभ दिन आया

शुभ दिन आया साथियों, आज तिरंगे संग।
गहरे भाव प्रतीक हैं, झंडे के ये रंग।
झंडे के ये रंग, कहे केसरिया हमसे,
बलिदानों ने मुक्त,किया भारत को तम से।
श्वेत शांति का दूत, हरे सँग खुशियाँ हर दिन।
चक्र रखे गतिमान, मुबारक सबको शुभ दिन।

लहराएँगे शान से, आज तिरंगा तान।
इस दिन मिली स्वतन्त्रता,साथ पूर्ण सम्मान।
साथ पूर्ण सम्मान, बहुत यह दिन पावन था,
नई भोर के साथ, उगा था सूर्य अमन का।
देश प्रेम के गीत, पुनः गाए जाएँगे,
भक्ति भाव के साथ, तिरंगा लहराएँगे।

अंतर्ज्वाला देश को, जला रही है आज।
अपने ही सिर देखना, सभी चाहते ताज।
सभी चाहते ताज, देश के लिए न कोई।
सिर्फ स्वार्थ के गीत, गा रहा देखें वो ही।
कहे ‘कल्पना’ मीत! सभी को मिले निवाला,
स्वर्ग बनाएँ देश, बुझाकर अंतर्ज्वाला।

भूल न जाएँ आज हम, वीरों के बलिदान।
आज़ादी के वास्ते, किए निछावर प्राण।
किए निछावर प्राण, क्रांति के अंकुर रोपे,
माँ की गोद उजाड़, तत्व निज, माँ को सौंपे।
कहे कल्पना दीप, याद का पुनः जलाएँ,
वीरों के बलिदान, आज हम भूल न जाएँ।

कल्पना रामानी
१ अगस्त २०१९


इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter