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ममतामयी
विश्वजाल पर माँ को समर्पित कविताओं का संकलन

 

माँ

चोट लगे तो मेरे तन में,
होती है सच पीर बड़ी
पर माँ की आँखों से धारा,
बह उठती है बहुत बड़ी

लगता माँ का फूलों-सा मन,
अति व्याकुल हो जाता है
इस दुनिया में माँ के मन-सा
कोई जोड़ न पाता है

अगर छुपे हैं माँ के आँचल
स्वर्ग न कुछ भी होता है
माँ की ममता के आगे तो,
सारा जग भी छोटा है

संतोष कुमार सिंह


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