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ममता की माँ धारा

 

 

 
१
न्यौछावर करती है
माँ घर में खुशियाँ
खुद चुन चुन भरती है

२
बच्चों की शैतानी
माँ बचपन जीती
नयनों झरता पानी

३
ममता की माँ धारा
पावन ज्योति जले
मिट जाए अँधियारा

४
माँ जैसी बन जाऊँ
छाया हूँ उनकी
कद तक न पहुँच पाऊँ

५
चंदन सा मन महके
ममता का आँचल
खिलता, बचपन चहके

-- शशि पुरवार
२९ सितंबर २०१४

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