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       तीन कुंडलिया

 

१.
जयपुर
चौड़ी सड़कें महल गढ़, रंग गुलाबी लाल
जयपुर रजवाड़े यहाँ, नगरी भव्य विशाल
नगरी भव्य विशाल, लुभाती सबको हरपल
जंतर-मंतर, हवा महल, घूमर की हलचल
आन-बान है शान कुरकुरी प्याज कचौड़ी
सबसे हैं मशहूर, यहाँ की सड़कें चौड़ी

२.
गीत-ग़ज़ल
गीत-ग़ज़ल में कह रहे हम तो अपनी बात
कोई दे शाबाशियाँ कोई घूँसे-लात
कोई घूँसे-लात चलाए कहने भर से
मौन रहे हम आज यहाँ इनके ही डर से
कहे विनीता चल पड़े इक दिन ऐसी रीत
लिखें प्रेम से मिल सभी अपने मन के गीत

३.
अमरीका
चर्चा जिसकी हर जगह, सबके मुँह पर नाम
दुनिया भर में एक ही, जहाँ मिला विश्राम
जहाँ मिला विश्राम, मिला धन-वैभव, मस्ती
है मानव का मोल, ज़िंदगी कभी न सस्ती
डॉलर में है आय, और डॉलर में खर्चा
अमरीका की विश्व, करे हर नुक्कड़ चर्चा

- विनीता तिवारी
१ फरवरी २०२६

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