 |
तीन कुंडलिया |
|
|
|
१
प्रेम
गहरा सागर प्रेम का, सँग अद्भुत अहसास
जो डूबा इसमें जहाँ, रत्न मिला है खास
रत्न मिला है खास, ईश के दर्शन करता
भौतिकता के पार, सदा रह दुख निज हरता
जीव करे उत्थान, हटे फिर भौतिक पहरा
प्रेम मात्र शुचि ज्ञान, अर्थ है जिसका गहरा
२
नारी
नारी शक्ति स्वरूपिणी, भिन्न भरे हर रंग
दुर्गा, काली, पार्वती, मातु शैलजा संग
मातु शैलजा संग, अंत करती हर बाधा
ममता की वे छाँव, वही है मीरा -राधा
मत करना अपमान, हिला दे दुनिया सारी
अबला से ये सृष्टि, शक्ति पुँज है यह नारी
३
कर्म
करते रहना कर्म को, कितनी रहे थकान
मनचाहा किसको मिला, जितनी रहे उड़ान
जितनी रहे उड़ान, तृप्त कब मन हो पाता
पाकर के परिणाम, खुशी से मन कब गाता
पग-पग बढ़ना मित्र!, कर्म शुचि दुख को हरते
पंकज बन ऐ जीव!भला चाहत क्यों करते
- वर्तिका अग्रवाल 'वरदा'
१ फरवरी २०२६ |
|
|
|
|