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तीन कुंडलिया |
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१
शिशिर ऋतु
जाती रितु हेमन्त ने, दिया शिशिर को न्योत
अलसायी है प्रकृति, जगा चेतना ज्योत
जगा चेतना ज्योत, फसल को यौवन देना
होवें सभी निरोग, दे तिल- गुड़ और छेना
'सुधा' धुन्ध हर रोज़, यही सन्देश सुनाती
बड़ी मनचली ठण्ड, बेखटक आती - जाती
२
दिवाली
बोला गर्वित दीप मैं, धरती का रजनीश
अधलेटी बाती हँसे, रख कंधे पर शीश
रख कंधे पर शीश, अगन से प्रीत लगाए
चुकती जाए उम्र, मगर बाती मुस्काए
बिन मोती ज्यों रिक्त, सीप का रहता चोला
त्यों बिन बाती व्यर्थ, दीप गर्वित बड़बोला
३
वृद्ध दिवस
बच्चे जैसे जब लगें, वृद्ध पिता के ढंग
अभिभावक बन जाइए, दो पल रहिए संग
दो पल रहिए संग, दीजिए उन्हें महत्ता
बोलें मीठे बोल, करें चिन्ता अलबत्ता
वृद्ध रहें सानन्द, साथ दें दिल से सच्चे
रखिए उनका ध्यान, समझकर नन्हे बच्चे
- सुधा राठौर
१ फरवरी २०२६ |
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