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       तीन कुंडलिया

 


धरती का शृंगार

हरियाली है साथियो, धरती का शृंगार
पर यह संभव है अगर, मिले सभी का प्यार
मिले सभी का प्यार, बचे पेड़ों का जीवन
पत्ते फल अरु फूल, दिखें अब हर घर आँगन
कहें शरद तैलंग, बनाएँ खुद को माली
वृक्ष लगायें खूब, नज़र आए हरियाली


वृक्षों की रक्षा

अगर बचाना चाहते, हम दुनिया को आज
वृक्षों की रक्षा करें, है यह उत्तम काज
है यह उत्तम काज, हवा में ज़हर घुला है
सबके सम्मुख आज मौत का द्वार खुला है
कहें शरद तैलंग, यही है पुण्य कमाना
कदम बढ़ाएँ हम, वृक्ष को अगर बचाना


ऋतु वसंत
दस्तक जब देने लगे ऋतु वसंत हर ओर
फूलों पर बढ़ने लगे जब भँवरों का शोर
जब भँवरों का शोर छटा बागों पर छाए
पहन नए परिधान वृक्ष फल फूल लुटाए
कहें शरद तैलंग उठाए अपना मस्तक
ऋतु वसंत दे रहा द्वार पर देखो दस्तक

- शरद तैलंग
१ फरवरी २०२६

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